भारत में हर साल लगभग 2.3 लाख नई महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण से प्रभावित होती हैं।
लेकिन क्या आप जानती हैं कि अगर यह रोग शुरुआती स्टेज पर पकड़ में आ जाए, तो इसका इलाज पूरी तरह संभव है?
दुर्भाग्यवश, कई महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण (Breast cancer ke lakshan) के शुरुआती संकेतों को सामान्य दर्द, थकान या हार्मोनल बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं।
यही गलती बाद में गंभीर रूप ले लेती है।
इसलिए आज हम जानेंगे वे 5 शुरुआती लक्षण जिन्हें कभी भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।
1. स्तन में गांठ या सूजन
सबसे आम और सबसे महत्वपूर्ण संकेत है स्तन या बगल में गांठ का महसूस होना।
हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन हर गांठ की जांच जरूरी होती है।
- अगर गांठ कठोर, दर्द रहित और बढ़ती हुई महसूस हो रही है,
- या अगर वह बगल (underarm) की तरफ बढ़ रही है,
तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अक्सर महिलाएं इसे मासिक धर्म या दूध की ग्रंथियों में बदलाव समझकर टाल देती हैं, जो आगे चलकर गंभीर परिणाम दे सकता है।
2. स्तन के आकार, रंग या त्वचा में बदलाव
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर झुर्रियां, सिकुड़न या “ऑरेंज पील” जैसी बनावट आम है।
यदि एक स्तन का आकार दूसरे से बदलता दिखे,
या त्वचा पर लालिमा, सूजन या मोटापन महसूस हो,
तो यह भी कैंसर का संकेत हो सकता है।
ध्यान रखें: त्वचा में कोई भी असामान्य बदलाव — भले ही हल्का क्यों न हो — विशेषज्ञ से जांच करवाना जरूरी है।

3. निप्पल (Nipple) में बदलाव या डिस्चार्ज
यदि निप्पल अचानक अंदर की ओर मुड़ जाए (Inversion),
या उसमें से रक्त, दूध जैसा या साफ तरल पदार्थ निकले,
तो इसे सामान्य समझने की गलती न करें।
निप्पल का रंग, आकार या बनावट बदलना भी
Ductal Carcinoma (एक प्रकार का ब्रेस्ट कैंसर) का शुरुआती संकेत हो सकता है।
4. स्तन की त्वचा पर जलन या खुजली
कई बार ब्रेस्ट की त्वचा पर लगातार खुजली, जलन या दर्दनाक दाने बनते हैं,
जिन्हें महिलाएं स्किन एलर्जी समझकर क्रीम लगा लेती हैं।
लेकिन अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें,
तो यह Inflammatory Breast Cancer का संकेत हो सकता है।
यह प्रकार तेजी से फैलता है, इसलिए
समय पर जांच और इलाज बहुत जरूरी है।
5. लगातार दर्द या भारीपन का एहसास
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती चरण में दर्द बहुत हल्का या कभी-कभी बिल्कुल नहीं होता।
फिर भी अगर किसी एक स्तन में लगातार भारीपन, कसाव या हल्का दर्द महसूस हो रहा है,
तो यह भी चेतावनी संकेत है।
कई महिलाएं इसे कपड़ों की टाइटनेस, पीरियड्स या वजन बढ़ने से जोड़ देती हैं —
लेकिन सच यह है कि ऐसे बदलाव शरीर का SOS सिग्नल हो सकते हैं।
ब्रेस्ट सेल्फ एग्ज़ामिनेशन (Breast Self-Examination) कैसे करें?
हर महिला को महीने में एक बार खुद की जांच करनी चाहिए।
यह जांच आप घर पर ही कर सकती हैं।
यह सबसे सरल और प्रभावी तरीका है शुरुआती लक्षण पहचानने का।
चरणबद्ध तरीका:
- आईने के सामने खड़े होकर दोनों स्तनों का निरीक्षण करें।
- आकार, रंग, त्वचा या निप्पल में कोई बदलाव तो नहीं?
- हाथों से हल्के दबाव से पूरे स्तन को गोलाई में जांचें।
- कोई गांठ, सूजन या कठोर हिस्सा महसूस तो नहीं हो रहा?
- निप्पल को हल्के दबाव से जांचें।
- कोई तरल पदार्थ निकल रहा है या दर्द हो रहा है?
- बगल (underarm) को भी जांचें।
- यहां मौजूद लसीका ग्रंथियां (lymph nodes) कई बार सूज जाती हैं।
सबसे अच्छा समय: पीरियड्स खत्म होने के 3 से 5 दिन बाद,
जब हार्मोनल सूजन कम होती है।
डॉक्टर से कब मिलें?
आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए अगर:
- स्तन या बगल में कोई कठोर गांठ महसूस हो
- त्वचा में सिकुड़न या लालिमा दिखे
- निप्पल से रक्त या असामान्य तरल पदार्थ निकले
- लगातार दर्द या सूजन बनी रहे
प्रारंभिक स्टेज में पकड़े गए कैंसर का इलाज 95% तक सफल हो सकता है।
इसलिए देर न करें।
नियमित जांच क्यों जरूरी है?
- 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को हर साल मेमोग्राफी करानी चाहिए।
- जिनके परिवार में पहले से ब्रेस्ट कैंसर के केस रहे हैं,
उन्हें 30 वर्ष की उम्र से ही जांच शुरू करनी चाहिए। - स्वस्थ जीवनशैली, व्यायाम और पौष्टिक आहार
ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को 40% तक कम कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या हर गांठ ब्रेस्ट कैंसर होती है?
नहीं। हर गांठ कैंसर नहीं होती।
कई बार ये हार्मोनल बदलाव, सिस्ट या फैटी टिश्यू के कारण होती हैं।
लेकिन किसी भी गांठ की अल्ट्रासाउंड या मेमोग्राफी जांच जरूरी है।
2. क्या ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण सिर्फ महिलाओं को होता है?
नहीं।
पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है, हालांकि यह बहुत दुर्लभ है।
भारत में लगभग हर 100 ब्रेस्ट कैंसर मरीजों में 1 पुरुष होता है।
3. ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती स्टेज में दर्द होता है क्या?
ज्यादातर मामलों में शुरुआती स्टेज में दर्द नहीं होता।
इसलिए अगर दर्द नहीं है, इसका मतलब यह नहीं कि सब ठीक है।
नियमित जांच ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
4. क्या ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण रोका जा सकता है?
कैंसर को पूरी तरह रोकना संभव नहीं,
लेकिन जीवनशैली में बदलाव से जोखिम काफी हद तक घटाया जा सकता है —
जैसे संतुलित आहार, व्यायाम, तंबाकू और शराब से परहेज,
और स्तनपान करवाना।
5. क्या ब्रेस्ट सेल्फ एग्ज़ामिनेशन भरोसेमंद है?
हाँ, यह एक बहुत उपयोगी प्राथमिक जांच है।
लेकिन यह डॉक्टर की जांच या मेमोग्राफी का विकल्प नहीं है।
यह आपको बदलाव पहचानने में मदद करता है ताकि आप समय पर जांच करा सकें।
6. अगर परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है तो क्या मुझे भी खतरा है?
यदि आपकी मां, बहन या दादी को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है,
तो आपके लिए जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसे में जेनेटिक काउंसलिंग और BRCA जीन टेस्टिंग करवाना उचित रहेगा।
निष्कर्ष
ब्रेस्ट कैंसर का डर केवल जागरूकता से ही खत्म हो सकता है।
समय पर लक्षण पहचानना और डॉक्टर से परामर्श लेना
जीवन बचाने जितना महत्वपूर्ण कदम है।
आज ही संकल्प लें —
हर महीने खुद की जांच करें,
और इस जानकारी को अपनी बहन, मां, और दोस्तों के साथ साझा करें।
क्योंकि “जानकारी ही बचाव है”।
👉 यदि कोई भी लक्षण दिखे, तो तुरंत Dr Harsh Atreya – Best Cancer Doctor in Lucknow से संपर्क करें।













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